Sunday, 2 November 2025

नीलकुरिंजी

कई बरस बाद दिखोगे

तुम कहीं-

और मैं खिल पडूंगा
बारह बरस में एक बार खिलने वाले
नीलकुरिंजी के फूलों की तरह।
तब तलक के
सारे बसंत
बेअसर जाएंगे मुझपे।।

(From Kitab-ganj )

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