Saturday, 21 March 2026

आना / केदारनाथ सिंह


जब समय मिले
जब समय न मिले
तब भी आना

आना
जैसे हाथों में
आता है जांगर*

जैसे धमनियों में
आता है रक्त

जैसे चूल्हों में
धीरे-धीरे आती है आँच

आना

आना जैसे बारिश के बाद
बबूल में आ जाते हैं
नए-नए काँटे

दिनों को
चीरते-फाड़ते
और वादों की धज्जियाँ उड़ाते हुए
आना

आना जैसे मंगल के बाद
चला आता है बुध
आना
...............
*जांगर : Energy, power, strength 

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